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काश की ये ज़िन्दगी भी एक नज़्म होती ...

आज एक अरसे बाद वो शायर फिर लौट आया है, ज़िन्दगी की आपा धापी का स्वाद चखकर ! ज़िन्दगी का हर ऐशो आराम उसे  किसी भी नज़्म की सादगी के आगे फीका सा लगा और वह सोचने लगा "काश की ये ज़िन्दगी भी  एक नज़्म होती .. " काश की ये ज़िन्दगी भी  एक नज़्म होती ..  छोटे बड़े मिसरों में  गुज़र बसर होती  आज को जीते हम आज ही  की तरह .. कल  की न कोई फ़िक्र होती !!!! लफ़्ज़ों को किसी धागे में पिरो लेते हम ... ख्यालों की ना कोई उम्र होती !!! खुदा की इबादत बन जाती हर एक बात ... ना दुआएं कोई बे-असर  होती !!! काश की ये ज़िन्दगी भी  एक नज़्म होती .. मर कर भी कभी न मरते हम .. मौत भी अपनी अमर होती !!!!! 

परिचय

 कभी आईने तलाशे ...कभी अंधेरों से अपने अक्स का पता पूछा . ढूंढते  रहे  अपने  आप  को  हम हर पल हर जगह । ज़िन्दगी एक तलाश सी लगने लगी है अब ......... एक अजीब सी कश्म्कश  है ये ज़िन्दगी ।।।। जो पास होता है उस से मिलते नहीं.... जो होता है दूर ,होती है उसकी आरज़ू !!!!  निकल पड़े हैं फिर से हम एक सफ़र पर... कि  कहीं पहुंच कर खुद तक पहुँच सकें ।।।। आजकल आईने में कोई और शख्स नज़र आता है!!!!!!!! कभी चले हम तन्हा ... और  कभी चले हम होकर भीड़ में शामिल .... अपने तारुफ्फ़ (परिचय) को तलाशते रहे हर शहर हर मंजिल!!!! ना सोचा था... कि...

नज़्म मिलती नहीं !!!!!!

कागज़ और कलम के दर्मियाँ एक नज़्म कहीं खो सी गई है ,ढूँढने कि लाख कोशिश कि पर वो मिलती ही नहीं !!आज ज़िन्दगी के इस सफ्हे पर अपना पता लिखे देता हूँ ..शायद वो ही मुझे ढूंढ ले ........ एक कैनवस पर बिखरे रंगों की तरह , लव्ज़ तो मिल जाते हैं ... पर वो नज़्म नहीं मिलती !!!!!! मेरी डायरी के कोरे सफहों में, सोये ख़याल तो मिल जाते हैं ... पर वो नज़्म नहीं मिलती !!!!!! मेरी कलम को ख्वाबों में , कुछ अधूरे मिसरे तो मिल जाते हैं .... पर वो नज़्म नहीं मिलती !!!!!!! काश नज्मों का भी कोई पता होता , की जब चाहे उनसे मिल पाते हम !! अब शायद वो नज़्म ही मुझे ढूंढ लेगी कहीं ... लापता हूँ आजकल अपने ही शहर में... अपना पता जेब में लिए फिरता हूँ !!!!!

इश्क ...इबादत

दिल सूफी होने लगा है , आशाओं के दरिया को उम्मीदों का साहिल मिल गया हो जैसे ! हर तरफ इश्क बरसता सा दिखता है ! मैं तेरे इश्क में दीवाना हुआ हूँ या तू मेरे इश्क में , मालूम ही नहीं होता ! कभी सोचा न था कि दीवानगी में भी कोई फ़न होगा , नज़रें बस तेरे सजदे में झुकती हैं , कान बस तेरा ही नाम सुनते हैं , होंठ जो कभी खुलते हैं तो लव्ज़ तेरी इबादत में निकली दुआ बन जाते हैं ! क्या नाम दूँ इस दीवानगी को .... इश्क ... इबादत ? ना मेरी कोई हस्ती , न मेरा कोई ठौर ठिकाना , मैं आशिक हुआ तेरा , दिल मेरा मलंग मस्ताना !!!!!! इश्क इबतादत या है इबादत इश्क ? तू मैं है या हूँ मैं तू ? हुआ है कौन किसका दीवाना ? ये भेद मैंने न जाना !!!! खुमारी तेरे इश्क कि , छाई रहती है आँखों पर लगे दीवानी मुझे सारी ये दुनिया ... पर लोग कहें मुझे तेरा दीवाना !!!!!!!!

चल चलें......

बरसों तुझसे प्यार किया,इंतज़ार भी किया ,कभी तुम ख्वाबों में सताती रही और कभी ख्यालों में आती रही! कभी जुगनुओं से तेरा पता पूछा और कभी टूटते तारों से तुझे माँगता रहा और अब जब तुम मिली तो दिल ने सदा दी ......चल चलें ...................... चल चलें ........ वहाँ जहाँ बादल करते हों पर्वतों से बातें !!!!!! चल चलें ........ वहाँ जहाँ पानियों पर बिछी हो लहरों की चादरें !!!!!!! चल चलें ........ चल कर किसी अब्र को छू लें .... और सहेज लें उसकी ठंडक ज़िन्दगी भर के लिए !!!!!! चल चलें ........ चल कर किसी खामोश वादी से पूछें .... की ये अल्फाज़ ख़ामोशी के तूने सीखे कहाँ से ? चल चलें ........ चल कर किसे बहते दरिया के किनारे बैठें , और डुबो के अपने पैरों को उसमें ,चुरा लें थोड़ी सी नमी उसकी !!!!! चल चलें ........ चल कर कहीं एक दूसरे तक पहुंचे , और समेट लें वक़्त को एक पल में ,उम्र भर के लिए !!!!!!!

रात के सवाल....

एक और रतजगे की रात,कुछ एहसासों,कुछ जज्बातों की रात !एक दास्ताँ सुनाती रात,दिल के किसी कोने में बसी है वो रात,जो आज फिर मचल उठी है कुछ कहने को ...... कल रात ने आख़िर पूछ ही लिया, इन नींद से अन्जान आंखों राज़ क्या है ? इस बेचैनी,बेख्याली का सबब क्या है? क्यों तू सहर तक तारों को ताकता रहता है ? क्यों तू रोज़ मेरे भेजे ख्वाब लौटा देता है ? वो तेरी कौन सी ऐसी मन्नत है,जिसके लिए मेरा हर तारा टूटने को तैयार है ? मैं बोला, सुन रात तेरे हर सवाल का जवाब इश्क है! आंखों में बस कर जो नींद चुरा ले जाए वो इश्क है! जो यार को ही रब बना दे वो इश्क है ! जिसके लिए हर ख्वाब को ठुकराया जा सके वो इश्क है ! तारे भी जिस मन्नत के लिए खुशी से टूट जाए वो इश्क है !!

मैं तो न सोया ....

मैं तो न सोया, जागा रहा सारी रात!! बनकर तारा , करने आईं थी तुम मुझसे बात !! आंखों आंखों में ही, कह दिया मैंने, चाहूँ ज़िन्दगी भर तेरा ही साथ!! प्यार हो तुम मेरा, मेरी चाहत हो , बस इतना ही कह दो आज !! मैं तो न सोया , जागा रहा सारी रात ........ दे दो गम अपने, ले लो खुशियाँ मेरी सारी !! मेरी खुशी बनकर रहना सदा, तुम तो हो फूलों से भी प्यारी !! जुड़ गए हैं हम अब , एक ही है ये ज़िन्दगी हमारी !! बस यूँ ही रिमझिम बरसती रहना तुम, बनकर प्यारी सी बरसात !! मैं तो न सोया , जागा रहा सारी रात ........ अब जीवन का हर पल , है एक नई ज़िन्दगी !! तेरा प्यार ही है मेरा खुदा, और मेरी बंदगी!! तुम ही तो बनकर आई हो, मेरी ज़िन्दगी में एक सुहानी सहर, और तुम ही कभी बन जाती हो , तारों भरी रात !! मैं तो न सोया , जागा रहा सारी रात ........