Sunday, October 4, 2015

काश की ये ज़िन्दगी भी एक नज़्म होती ...

आज एक अरसे बाद वो शायर फिर लौट आया है, ज़िन्दगी की आपा धापी का स्वाद चखकर ! ज़िन्दगी का हर ऐशो आराम उसे  किसी भी नज़्म की सादगी के आगे फीका सा लगा और वह सोचने लगा "काश की ये ज़िन्दगी भी  एक नज़्म होती .. "




काश की ये ज़िन्दगी भी  एक नज़्म होती .. 

छोटे बड़े मिसरों में 
गुज़र बसर होती 

आज को जीते हम आज ही  की तरह ..
कल  की न कोई फ़िक्र होती !!!!

लफ़्ज़ों को किसी धागे में पिरो लेते हम ...
ख्यालों की ना कोई उम्र होती !!!

खुदा की इबादत बन जाती हर एक बात ...
ना दुआएं कोई बे-असर  होती !!!

काश की ये ज़िन्दगी भी  एक नज़्म होती ..

मर कर भी कभी न मरते हम ..
मौत भी अपनी अमर होती !!!!! 

Sunday, May 6, 2012

परिचय

 कभी आईने तलाशे ...कभी अंधेरों से अपने अक्स का पता पूछा . ढूंढते  रहे  अपने  आप  को  हम हर पल हर जगह । ज़िन्दगी एक तलाश सी लगने लगी है अब .........

एक अजीब सी कश्म्कश  है ये ज़िन्दगी ।।।।

जो पास होता है उस से मिलते नहीं....
जो होता है दूर होती है उसकी आरज़ू !!!!

 निकल पड़े हैं फिर से हम एक सफ़र पर...
कि  कहीं पहुंच कर खुद तक पहुँच सकें ।।।।
आजकल आईने में कोई और शख्स नज़र आता है!!!!!!!!

कभी चले हम तन्हा ...
और  कभी चले हम होकर भीड़ में शामिल ....
अपने तारुफ्फ़ (परिचय) को तलाशते रहे हर शहर हर मंजिल!!!!

ना सोचा था...
कि इतना भी मुश्किल हो सकता है ...खुद को खुद से मिलवाना  
जो मिले खुद से हम....
तो नाम पूछ बैठे!!!

Sunday, August 7, 2011

नज़्म मिलती नहीं !!!!!!

कागज़ और कलम के दर्मियाँ एक नज़्म कहीं खो सी गई है ,ढूँढने कि लाख कोशिश कि पर वो मिलती ही नहीं !!आज ज़िन्दगी के इस सफ्हे पर अपना पता लिखे देता हूँ ..शायद वो ही मुझे ढूंढ ले ........

एक कैनवस पर बिखरे रंगों की तरह ,
लव्ज़ तो मिल जाते हैं ...
पर वो नज़्म नहीं मिलती !!!!!!

मेरी डायरी के कोरे सफहों में,
सोये ख़याल तो मिल जाते हैं ...
पर वो नज़्म नहीं मिलती !!!!!!

मेरी कलम को ख्वाबों में ,
कुछ अधूरे मिसरे तो मिल जाते हैं ....
पर वो नज़्म नहीं मिलती !!!!!!!

काश नज्मों का भी कोई पता होता ,
की जब चाहे उनसे मिल पाते हम !!

अब शायद वो नज़्म ही मुझे ढूंढ लेगी कहीं ...
लापता हूँ आजकल अपने ही शहर में...
अपना पता जेब में लिए फिरता हूँ !!!!!

Sunday, November 29, 2009

चल चलें......

बरसों तुझसे प्यार किया,इंतज़ार भी किया ,कभी तुम ख्वाबों में सताती रही और कभी ख्यालों में आती रही! कभी जुगनुओं से तेरा पता पूछा और कभी टूटते तारों से तुझे माँगता रहा और अब जब तुम मिली तो दिल ने सदा दी ......चल चलें ......................

चल चलें ........
वहाँ जहाँ बादल करते हों पर्वतों से बातें !!!!!!

चल चलें ........
वहाँ जहाँ पानियों पर बिछी हो लहरों की चादरें !!!!!!!

चल चलें ........
चल कर किसी अब्र को छू लें ....
और सहेज लें उसकी ठंडक ज़िन्दगी भर के लिए !!!!!!

चल चलें ........
चल कर किसी खामोश वादी से पूछें ....
की ये अल्फाज़ ख़ामोशी के तूने सीखे कहाँ से ?

चल चलें ........
चल कर किसे बहते दरिया के किनारे बैठें ,
और डुबो के अपने पैरों को उसमें ,चुरा लें थोड़ी सी नमी उसकी !!!!!

चल चलें ........
चल कर कहीं एक दूसरे तक पहुंचे ,
और समेट लें वक़्त को एक पल में ,उम्र भर के लिए !!!!!!!

Thursday, April 30, 2009

रात के सवाल....

एक और रतजगे की रात,कुछ एहसासों,कुछ जज्बातों की रात !एक दास्ताँ सुनाती रात,दिल के किसी कोने में बसी है वो रात,जो आज फिर मचल उठी है कुछ कहने को ......

कल रात ने आख़िर पूछ ही लिया,
इन नींद से अन्जान आंखों राज़ क्या है ?
इस बेचैनी,बेख्याली का सबब क्या है?
क्यों तू सहर तक तारों को ताकता रहता है ?
क्यों तू रोज़ मेरे भेजे ख्वाब लौटा देता है ?
वो तेरी कौन सी ऐसी मन्नत है,जिसके लिए मेरा हर तारा टूटने को तैयार है ?

मैं बोला,
सुन रात तेरे हर सवाल का जवाब इश्क है!
आंखों में बस कर जो नींद चुरा ले जाए वो इश्क है!
जो यार को ही रब बना दे वो इश्क है !
जिसके लिए हर ख्वाब को ठुकराया जा सके वो इश्क है !
तारे भी जिस मन्नत के लिए खुशी से टूट जाए वो इश्क है !!

Friday, March 13, 2009

मैं तो न सोया ....

मैं तो न सोया,
जागा रहा सारी रात!!
बनकर तारा ,
करने आईं थी तुम मुझसे बात !!
आंखों आंखों में ही,
कह दिया मैंने,
चाहूँ ज़िन्दगी भर तेरा ही साथ!!
प्यार हो तुम मेरा,
मेरी चाहत हो ,
बस इतना ही कह दो आज !!
मैं तो न सोया ,
जागा रहा सारी रात ........


दे दो गम अपने,
ले लो खुशियाँ मेरी सारी !!
मेरी खुशी बनकर रहना सदा,
तुम तो हो फूलों से भी प्यारी !!
जुड़ गए हैं हम अब ,
एक ही है ये ज़िन्दगी हमारी !!
बस यूँ ही रिमझिम बरसती रहना तुम,
बनकर प्यारी सी बरसात !!
मैं तो न सोया ,
जागा रहा सारी रात ........


अब जीवन का हर पल ,
है एक नई ज़िन्दगी !!
तेरा प्यार ही है मेरा खुदा,
और मेरी बंदगी!!
तुम ही तो बनकर आई हो,
मेरी ज़िन्दगी में एक सुहानी सहर,
और तुम ही कभी बन जाती हो ,
तारों भरी रात !!
मैं तो न सोया ,
जागा रहा सारी रात ........


Friday, January 23, 2009

एक सफहा मेरी डायरी का.....

एक सफहा मेरी डायरी का,
कुछ नाराज़ है मुझसे ,
वो मेरी एक नज़्म छुपाये बैठा है ,
जैसे जादुई स्याही से राज़ छुपाये जाते हैं !!!!!

हर तरकीब आज़मा ली उसे मनाने की,
और अपनी नज़्म वापस हथियाने की ,
पर सारी कोशिशें बेकार हुईं ,
जैसे तूफानों में नशेमन बिखर जाते हैं !!!!

शायद नज़रों का धोखा है ,
या फिर कोई छलावा,
मैं कोरे कागज़ को ही नज़्म समझे बैठा हूँ ,
जैसे सहराओं में सराब* नज़र आ जाते हैं !!!!


*सराब ->दृष्टि भ्रम