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अनामिका !!!!!!

सोचा था कि तुझे एक नाम दूंगा ,सारे नाम तेरी हस्ती के आगे फीके पड़ रहे थे ,फिर सोचा की नाम में क्या रखा है ,गुमनामी में भी एक नाम छुपा होता है !तुझे नज़्म कहने से भला है की तू अनामिका ही रहे ............ जब मैं ,मैं नही था ,तब मैं मेरे मैं होने की तमन्ना करता था , आज जब मैं ,मैं हूँ ,तब भी मैं,मैं होकर मैं नहीं ! ख़ुद को पहचानने के लिए सौ जिंदगियाँ भी नाकाफी हैं !!!!!!! एक रात ,रतजगों से ऊबकर ,मेरी आँखों ने मुझसे नींद की गुजारिश की थी , अब जो सोता हूँ तो नींद में मेरी आँखें रतजगों के ख्वाब देखती हैं ! न जाने ये आँखें मुझसे क्या चाहती हैं !!!!!!!!!! तेरी आमद पर फिर कोई सफहा खुले ,कुछ ऐसी ही उम्मीद है मेरे यारों को , तेरी आमद की उम्मीद में देख ,मैंने आज फिर सितारों से शब् सजाई है ! ये उम्मीदें भी अजीब होती हैं ,इंसानों को कभी ना-उम्मीद नही होने देतीं !!!!!!!!!!! मैं कौन हूँ?? मैं तो वही हूँ जो पहले था , न आलम बदला ,और ना ही दुनिया बदली है ! ख़ुद से अजनबी लोगों की पहचान भला क्या होगी !!!!!!!! ये बंजारन सी ज़िन्दगी,एक पल भी थमती नहीं, इस पल यहाँ डाला है डेरा,अगले पल की ख़बर नही ! सुना है ज़ि...

इक रोज़ जब.....

इक रोज़ जब ज़िन्दगी से फिर हारा था मैं, तो मैंने मौत से मौत मांगी, मौत ने भी दुत्कारा मुझे और कहा, जियेगा यूँ ,तो तेरी ज़िन्दगी ही तुझे मारेगी, हो जाएगा तू बेबस इतना,कि तेरी हर हिम्मत भी हारेगी! मौत मांगे नही मिलती, मौत खैरात में नही बंटती, मौत सिर्फ़ मरने का नाम नही, एक शानदार मौत को भी जिया जाता है, जा,जाकर फिर से जी,हर पल को अपने आगोश में ले, हर पल ज़िन्दगी कि आंखों से आँखें मिला, जा कह दे उस ज़िन्दगी से,मैंने जीना सीख लिया है, तुझको तो मैं जीतूँगा एक दिन, और अपनी मौत को भी जी जाऊँगा !!!!!!!!!!