Posts

Showing posts with the label रतजगे

अनामिका-२

घने अंधेरे और तन्हाई में भी, वो नीम का पेड़ मुस्कुराता है !!!! कल एक जुगनू आया था उसे रौशन करने !!!!!!!! आंखों ने रतजगों से आशिकी कर ली, खुली आंखों के ख्वाब शायद सच हो जायें !!!! नींद फ़िर गुमशुदा है कल से !!!! बूढे पीपल पर धागा बाँध कर, तुझे पाने की मन्नत की थी !!!! कच्चे धागे में बंधी पक्की मन्नत आज खुल गई !!!!!! तेरी आंखों से मेरी आँखें मिलने का लम्हा, चुरा कर संजो लिया था मैंने!!!! आज वक्त ने चोरी करते पकड़ लिया मुझको !!!!!!!! कभी एक लम्हा सदियों सा लगा, कभी कई सदियाँ एक लम्हे में गुजार दी !!!! ये वक्त भी बड़ा मूडी है !!!!!!!!!