Posts

Showing posts with the label रौशनी

शाम

ये शाम सज कर आई है आज मेरे लिए , होठों पे लिए मुस्कान और जलाये तारों के दीये , कभी यों लगता है मैं बना हूँ इसके लिए, और ये बनी है सिर्फ़ मेरे लिए गर तुम भी देख पाओ इन अंधेरों की रौशनी को, तो जान जाओगे कि हर रौशनी जली है किसी अंधेरे के लिए