मैं अकेला ही चलूँगा ......
अब मैं अकेला ही चलूँगा जानिबे अमन!
कितनी भी कठिन डगर हो,
हर कदम गुमराह होने का डर हो,
जीत बसी है मेरे हर तस्सवुर में,
इक रोज़ हासिल करूँगा मैं मंजिल को!!!
बंद दरवाजों में सहमे बैठे हैं लोग ,
कुछ खफा खफा,नाराज़ से लोग ,
उन तक ये पैगाम पहुंचे ,
ज्यों जलेगी एक भी शम्मा ,दूर अँधेरा होगा!!!!
सुना है ,कल जली थी एक शम्मा ,
आज सैंकडों शम्मे रौशन होंगी ,
जिस राह पर मैं कल तलक था तन्हा,
उस राह पर आज सारी दुनिया होगी!!!!!
मैं अकेला ही चला था जानिबे अमन ,आज देखो मेरे सैंकडों हांथ हैं !!!!!!!!!!!!!!
कितनी भी कठिन डगर हो,
हर कदम गुमराह होने का डर हो,
जीत बसी है मेरे हर तस्सवुर में,
इक रोज़ हासिल करूँगा मैं मंजिल को!!!
बंद दरवाजों में सहमे बैठे हैं लोग ,
कुछ खफा खफा,नाराज़ से लोग ,
उन तक ये पैगाम पहुंचे ,
ज्यों जलेगी एक भी शम्मा ,दूर अँधेरा होगा!!!!
सुना है ,कल जली थी एक शम्मा ,
आज सैंकडों शम्मे रौशन होंगी ,
जिस राह पर मैं कल तलक था तन्हा,
उस राह पर आज सारी दुनिया होगी!!!!!
मैं अकेला ही चला था जानिबे अमन ,आज देखो मेरे सैंकडों हांथ हैं !!!!!!!!!!!!!!
Comments
आज सैंकडों शम्मे रौशन होंगी ,
जिस राह पर मैं कल तलक था तन्हा,
उस राह पर आज सारी दुनिया होगी!!!!!
बहुत सकारात्मक सोच...काश ऐसा ही हो....
नीरज
आज सैंकडों शम्मे रौशन होंगी ,....
बहुत ही भावुक कविता...
धन्यवाद
कुछ खफा खफा,नाराज़ से लोग ,
उनक तक ये पैगाम पहुंचे ,
ज्यों जलेगी एक भी शम्मा ,दूर अँधेरा होगा!!!!
बहुत अनुकरणिय विचार ! आपको बहुत शुभकामनाए !
राम राम !
आज सैंकडों शम्मे रौशन होंगी ,
जिस राह पर मैं कल तलक था तन्हा,
उस राह पर आज सारी दुनिया होगी!
मैं अकेला ही चला था जानिबे अमन ,
आज देखो मेरे सैंकडों हांथ हैं!
बहुत सुंदर! अमन की यह शमा इसी तरह रौशन रहे, आमीन!
achchha likha hai , is mishan main , main bhi aapake sath hoon ,
mere blog par aane ke liye shukriya ,
madgushala ka madhur sangeet bha gaya .
aapkee profile ka andaaze-bayaan bhee aur hai .
बंद दरवाजों में सहमे बैठे हैं लोग ,
कुछ खफा खफा,नाराज़ से लोग ,
उनक तक ये पैगाम पहुंचे ,
ज्यों जलेगी एक भी शम्मा ,दूर अँधेरा होगा!!!!
ek shama ek mashaal bhi andhere ko door kar degi bus koi to uthe aur jalaye