आदतें
आदतें भी अज़ीब होती हैं ,
बिना किसी रिश्ते के, ताउम्र को हमदम हो जाती हैं !
कभी वो जाती नहीं , तो कभी जाते जाते जातीं हैं
आदतें भी अज़ीब होती हैं ,
न जाने कब आदत बन जाती हैं !
मेरी भी एक मधुशाला है ,यह बच्चन जी की मधुशाला की हाला का कतरा भर भी नही,फिर भी ये मेरी मधुशाला है .इसमे हर पीने वाले का स्वागत है ..हर उस दोस्त का स्वागत है जो इस जीवन मधुशाला को और जानना चाहता है ..मेरी मधुशाला एक प्रयास है ख़ुद को जानने का...उम्मीद है यह इस जीवन की कसौटी पर खरी उतरेगी.
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